गौमाता सड़कों पर, कचरे में भोजन तलाशने को मजबूर – आखिर जिम्मेदार कौन?
महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत अनेक ग्राम पंचायतों में एक चिंताजनक दृश्य देखने को मिल रहा है। जिन गौमाताओं को सनातन धर्म में माता का दर्जा दिया गया है, जिनके दूध, गोबर और घी का उपयोग पूजा-पाठ एवं धार्मिक कार्यों में किया जाता है, वही गौमाता आज सड़कों पर भटकने और कचरा खाने को मजबूर हैं।गांवों और चौक-चौराहों पर आवारा पशु सड़क के बीचों-बीच बैठे रहते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। कई स्थानों पर गायों को प्लास्टिक और अन्य हानिकारक कचरा खाते देखा जा सकता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि गौवंश की सुरक्षा, उचित देखभाल और गौशालाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। केवल "गौमाता की जय" बोलना ही नहीं, बल्कि उनकी सेवा और संरक्षण करना भी हमारा कर्तव्य है।संदेश:"धर्मो रक्षति रक्षितः" — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।जय गौमाता। 🚩🐄बैनर लाइन:🔴 "पूजते हैं गौमाता को, फिर क्यों कचरे में भोजन करने को मजबूर?"🔴 "सड़क पर भटकती गौमाता, समाज से पूछ रही सवाल"🔴 "गौ संरक्षण केवल नारा नहीं, हमारी जिम्मेदारी है"जगन्नाथ महाराज प्रेस | महासमुंद, छत्तीसगढ़जय गौमाता • जय सनातन धर्म • जय जगन्नाथ 🚩🙏🐄 पूर्णप्रिया
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