आज हम आपको भारत की एक ऐसी इंजीनियरिंग उपलब्धि के बारे में बताएंगे जिसे दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों में गिना जाता है। हम बात कर रहे हैं ओडिशा के प्रसिद्ध Hirakud Dam की।

जगरनाथ न्यूज़ 24×7 | संपादक सरोज मिश्रा जी महाराज

नमस्कार दर्शकों, आज हम आपको भारत की एक ऐसी इंजीनियरिंग उपलब्धि के बारे में बताएंगे जिसे दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों में गिना जाता है। हम बात कर रहे हैं ओडिशा के प्रसिद्ध Hirakud Dam की। 

हीराकुंड बांध महानदी नदी पर ओडिशा के संबलपुर के निकट स्थित है। इसका निर्माण बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और विद्युत उत्पादन के लिए किया गया था। इस परियोजना की आधारशिला 1946 में रखी गई और निर्माण कार्य स्वतंत्रता के बाद शुरू हुआ। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने 1948 में निर्माण कार्य का शुभारंभ किया तथा 1957 में इसका उद्घाटन किया।

यदि इसकी लंबाई की बात करें तो मुख्य बांध लगभग 4.8 किलोमीटर लंबा है, जबकि दोनों ओर बने मिट्टी के तटबंधों सहित इसकी कुल लंबाई लगभग 25.8 किलोमीटर है। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों में गिना जाता है। इसकी ऊँचाई लगभग 61 मीटर है। 

हीराकुंड बांध केवल मिट्टी का नहीं है, बल्कि इसमें मिट्टी, कंक्रीट और चिनाई (मेसनरी) का उपयोग किया गया है। यह एक मिश्रित संरचना वाला बांध है। 

बांध में जल निकासी के लिए कुल 98 गेट हैं, जिनमें 64 स्लूस गेट और 34 क्रेस्ट गेट शामिल हैं। 

हीराकुंड जलाशय लगभग 55 किलोमीटर तक फैला हुआ है और इसका जल क्षेत्र लगभग 743 वर्ग किलोमीटर है। यह भारत के सबसे बड़े कृत्रिम जलाशयों में से एक माना जाता है।

बांध के दोनों सिरों पर दो प्रसिद्ध दर्शनीय मीनारें स्थित हैं – Gandhi Minar और Jawahar Minar। गांधी मीनार लगभग 65 फीट ऊँची है और यहां से पूरे जलाशय तथा बांध का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।

संबलपुर शहर से हीराकुंड बांध की दूरी लगभग 15 से 16 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। �


इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य महानदी क्षेत्र में आने वाली विनाशकारी बाढ़ को नियंत्रित करना, लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करना तथा जलविद्युत उत्पादन करना है। वर्तमान में यह बांध ओडिशा के कई जिलों की कृषि और बिजली व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। �


हीराकुंड बांध केवल एक जल परियोजना नहीं बल्कि स्वतंत्र भारत के विकास का प्रतीक है। इसकी विशालता, प्राकृतिक सौंदर्य, गांधी मीनार, जवाहर मीनार और विशाल जलाशय हर वर्ष लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। �


**कैमरामैन के साथ, जगरनाथ न्यूज़ 24×7 के लिए मैं सरोज मिश्रा जी महाराज। जय जगन्नाथ।**

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