सरायपाली क्षेत्र की नल-जल योजना में अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची शिकायतसरायपाली, महासमुंद।छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कार्यालय में सरायपाली अनुविभाग अंतर्गत लगभग 107 ग्राम पंचायतों एवं आश्रित ग्रामों में संचालित नल-जल योजना से संबंधित विभिन्न समस्याओं और कथित अनियमितताओं को लेकर एक महत्वपूर्ण शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन भारत के राष्ट्रीय महासचिव तथा अतिरिक्त छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष पंडित टिकेश्वर मिश्रा द्वारा प्रस्तुत की गई।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से नल-जल योजनाओं का निर्माण कराया गया है, लेकिन अनेक गांवों में आज भी योजना का अपेक्षित लाभ आम ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कई स्थानों पर पानी टंकियों का निर्माण कार्य अधूरा है, जबकि कहीं पाइपलाइन विस्तार एवं जल आपूर्ति व्यवस्था अभी तक सुचारू रूप से प्रारंभ नहीं हो सकी है।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ क्षेत्रों में कार्य पूर्ण हुए बिना ही संबंधित ठेकेदारों को भुगतान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस कारण ग्रामीणों को शासन की महत्वाकांक्षी योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सभी निर्माण कार्यों एवं भुगतान प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जहां कहीं भी अनियमितता पाई जाए वहां संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।पंडित टिकेश्वर मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण जनता को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है तो इसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर वास्तविक स्थिति की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।हालांकि शिकायत में ग्राम पंचायत बैतारी का विशेष उल्लेख करते हुए यह भी बताया गया है कि वहां सरपंच, सचिव एवं पंच-परमेश्वर के सहयोग से ग्राम के विभिन्न वार्डों में नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल रही है। स्थानीय स्तर पर जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।शिकायत पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर महासमुंद सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी भेजी गई है, ताकि मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। क्षेत्र के ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज होने के बाद नल-जल योजना से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा और सभी गांवों तक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था प्रभावी रूप से पहुंच सकेगी।ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की मूलभूत आवश्यकता से जुड़ी योजना है। यदि इसका क्रियान्वयन पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से हो तो हजारों परिवारों को प्रतिदिन स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकता है। इसलिए योजना के प्रत्येक कार्य की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और जल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी आवश्यक है।अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला क्षेत्र में नल-जल योजनाओं के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।
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