स्कूल चले हम, स्कूल चले हम, सपनों को बस्ते में भरकर स्कूल चले हम..."भीषण गर्मी हो, तपती धूप हो या कठिन रास्ते, शिक्षा की लौ को कोई नहीं बुझा सकता। ये तस्वीरें हैं शासकीय माध्यमिक शाला रिमजी की, जहाँ नन्हे विद्यार्थी अपने उज्ज्वल भविष्य के सपनों को आँखों में सजाए हर दिन स्कूल पहुँच रहे हैं।16 जून 2026 को नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ बच्चों के चेहरों पर उत्साह और सीखने की नई उमंग साफ दिखाई दे रही है। कक्षा में बैठकर विज्ञान के प्रयोग करते ये बच्चे बता रहे हैं कि संसाधन चाहे सीमित हों, लेकिन हौसले और सपने असीमित हैं।भीषण गर्मी में जब तापमान लगातार बढ़ रहा है, तब भी ये विद्यार्थी शिक्षा की राह से पीछे नहीं हट रहे। पसीने की हर बूंद इनके संघर्ष की कहानी कहती है और हर मुस्कान इनके सुनहरे भविष्य का संकेत देती है।शिक्षक और अभिभावक भी बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो समाज और देश का भविष्य बदल सकती है।बाइट / वॉइस ओवर"धूप कितनी भी तेज क्यों न हो, मंज़िल की चाह उससे भी बड़ी है। ये बच्चे हमें सिखाते हैं कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, अगर सपने बड़े हों तो हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।"समापन"स्कूल चले हम, स्कूल चले हम, सपनों को बस्ते में भरकर स्कूल चले हम..."शासकीय माध्यमिक शाला रिमजी के इन होनहार बच्चों को हमारा सलाम। शिक्षा की इस यात्रा में उनका हर कदम सफलता की ओर बढ़ता रहे, यही कामना है।
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